सीईईडब्ल्यू अध्ययन के अनुसार भारत में सौर कचरे की रीसाइकलिंग से 2047 तक इस क्षेत्र की विनिर्माण जरूरतों का 38 प्रतिशत हिस्सा पूरा किया जा सकता है. साथ में, नई सामग्री की जगह पर इन्हें ही दोबारा इस्तेमाल करने से 37 मिलियन टन कार्बन उत्सर्जन भी बचाया जा सकता है. ऐसे में इससे पर्यावरण और मार्केट दोनों को डबल फायदा हो सकता है.
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